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हीमोथोरेक्स (छाती की गुहा में रक्त): दूरबीन सर्जरी (VATS) की भूमिका क्या है?

हीमोथोरेक्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें छाती की गुहा में रक्त एकत्रित हो जाता है। इस गंभीर स्थिति का उपचार आवश्यक है और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। मेदांता के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार ने हीमोथोरेक्स के उपचार में दूरबीन सर्जरी (VATS) की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

हीमोथोरेक्स क्या है?

हीमोथोरेक्स का अर्थ है छाती की गुहा के अंदर रक्त का एकत्रित होना। डॉ. कुमार के अनुसार, इस स्थिति में छाती के अंदर जमा हुए रक्त को निकालना अत्यंत आवश्यक होता है। यह स्थिति विभिन्न कारणों से हो सकती है और इसका समय पर उपचार न होने पर गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

हीमोथोरेक्स के उपचार में सर्जरी की भूमिका

हीमोथोरेक्स के उपचार में सर्जरी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ. कुमार बताते हैं कि छाती के अंदर जमा हुए रक्त को निकालने के लिए ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। इसके बजाय, आधुनिक तकनीक दूरबीन सर्जरी (VATS - Video-Assisted Thoracoscopic Surgery) का उपयोग किया जा सकता है।

दूरबीन सर्जरी (VATS) का उपयोग

दूरबीन सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है जिसमें छोटे चीरों के माध्यम से विशेष उपकरणों का उपयोग करके सर्जरी की जाती है। डॉ. कुमार के अनुसार, हीमोथोरेक्स के उपचार में VATS के द्वारा छाती के अंदर जाकर जमे हुए रक्त के थक्कों (क्लॉट्स) को निकाला जा सकता है।

इस प्रक्रिया में, सर्जन दूरबीन के माध्यम से छाती के अंदर देख सकते हैं और रक्त के थक्कों को निकलते हैं। डॉ. कुमार बताते हैं कि जब रक्त के थक्के जम जाते हैं, तो वे एक साथ नहीं निकलते। इसलिए उन्हें टुकड़े-टुकड़े करके धीरे-धीरे निकालना पड़ता है।

लंबे समय तक हीमोथोरेक्स रहने पर क्या होता है?

डॉ. कुमार यह भी बताते हैं कि अगर हीमोथोरेक्स लंबे समय तक रहता है, तो फेफड़े के संकुचित (कोलैप्स) हो जाते हैं और उनके ऊपर एक मोटी सी परत जम जाती है। इस स्थिति को “ट्रैप्ड लंग” (फंसा हुआ फेफड़ा) कहते हैं।

अगर इस परत को नहीं निकाला जाता और केवल जमे हुए रक्त (हीमोथोरेक्स) को निकाल दिया जाता है, तो फेफड़ा पूरी तरह से फैल नहीं पाता। इसके परिणामस्वरूप, बाद में फिर से उस स्थान पर रक्त, तरल पदार्थ या मवाद जमा हो सकता है।

डिकॉर्टिकेशन प्रक्रिया

ऐसे मामलों में जहां फेफड़े के ऊपर परत जम गई है, डॉ. कुमार बताते हैं कि “डिकॉर्टिकेशन” नामक एक प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में, फेफड़े के ऊपर से जमी हुई परत को हटाया जाता है।

डॉ. कुमार इस प्रक्रिया को समझाने के लिए एक सरल उदाहरण देते हैं - यह प्रक्रिया ऐसी ही है जैसे केले के ऊपर से छिलका उतारा जाता है। जब यह परत हटा दी जाती है, जो फेफड़े को फैलने से रोक रही थी, तब फेफड़ा पूरी तरह से फैल जाता है।

जब फेफड़ा पूरी तरह से फैल जाता है, तो छाती में कोई खाली जगह नहीं रहती और रक्त के वापस जमा होने या पानी के जमा होने की संभावना नहीं रहती।

VATS के लाभ

डॉ. कुमार स्पष्ट करते हैं कि हीमोथोरेक्स के उपचार में दूरबीन द्वारा सर्जरी (VATS) संभव है और इसके कई लाभ हैं:

  • इससे रक्त के थक्के निकाले जा सकते हैं।

  • अगर फेफड़े के ऊपर परत जम गई है, तो VATS के माध्यम से डिकॉर्टिकेशन भी किया जा सकता है।

  • यह प्रक्रिया मरीज की समस्या को स्थायी रूप से हल कर देती है।

  • फेफड़ा पूरी तरह से फैल जाता है।

  • धीरे-धीरे मरीज 100% सामान्य जीवन में वापस लौट जाता है।

निष्कर्ष

हीमोथोरेक्स एक गंभीर स्थिति है जिसमें छाती की गुहा में रक्त जमा हो जाता है। इसके उपचार में दूरबीन सर्जरी (VATS) एक प्रभावी विकल्प है। यह तकनीक न केवल जमे हुए रक्त को निकालने में मदद करती है, बल्कि लंबे समय तक हीमोथोरेक्स रहने पर होने वाली जटिलताओं, जैसे ट्रैप्ड लंग, का भी इलाज करती है। डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, VATS के माध्यम से मरीज की समस्या स्थायी रूप से हल हो जाती है और वह पूर्ण स्वस्थ जीवन जी सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हीमोथोरेक्स क्या है?

हीमोथोरेक्स छाती की कैविटी के अंदर रक्त का एकत्रित होना है। इस स्थिति में व्यक्ति को सीने में तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, और थकान, कमजोरी, या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

क्या हीमोथोरेक्स के इलाज के लिए ओपन सर्जरी जरूरी है?

नहीं, डॉ. कुमार के अनुसार, हीमोथोरेक्स के इलाज के लिए ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। इसके बजाय दूरबीन सर्जरी (VATS) का उपयोग किया जा सकता है।

दूरबीन सर्जरी (VATS) क्या है?

VATS (Video-Assisted Thoracoscopic Surgery) एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक है जिसमें दूरबीन के माध्यम से छाती के अंदर देखकर जमे हुए रक्त के थक्कों को निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में छोटे चीरों के माध्यम से विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

जमे हुए रक्त के थक्कों को कैसे निकाला जाता है?

डॉ. कुमार बताते हैं कि जब रक्त के थक्के जम जाते हैं, तो वे एक साथ नहीं निकलते। इसलिए उन्हें टुकड़े-टुकड़े करके धीरे-धीरे निकालना पड़ता है।

अगर हीमोथोरेक्स लंबे समय तक रहे तो क्या होता है?

अगर हीमोथोरेक्स लंबे समय तक रहता है, तो फेफड़े के संकुचित (कोलैप्स) हो जाते हैं और उन पर एक मोटी सी परत जम जाती है। इस स्थिति को “ट्रैप्ड लंग” (फंसा हुआ फेफड़ा) कहते हैं। इस स्थिति में फेफड़ा पूरी तरह से फैल नहीं पाता और बाद में फिर से समस्याएं हो सकती हैं।

“ट्रैप्ड लंग” का इलाज कैसे किया जाता है?

“ट्रैप्ड लंग” के इलाज के लिए “डिकॉर्टिकेशन” नामक प्रक्रिया की जाती है। इसमें फेफड़े के ऊपर से जमी हुई परत को हटाया जाता है, जैसे केले के ऊपर से छिलका उतारा जाता है। इससे फेफड़ा पूरी तरह से फैल जाता है।

VATS के क्या लाभ हैं?

VATS के कई लाभ हैं: इससे रक्त के थक्के निकाले जा सकते हैं, डिकॉर्टिकेशन किया जा सकता है, मरीज की समस्या स्थायी रूप से हल हो जाती है, फेफड़ा पूरी तरह से फैल जाता है, और मरीज धीरे-धीरे 100% सामान्य जीवन में वापस लौट जाता है।

VATS सर्जरी के बाद रोगी को पूर्ण स्वास्थ्य मिल जाता है?

हां, डॉ. कुमार के अनुसार, VATS के माध्यम से उपचार के बाद धीरे-धीरे मरीज 100% सामान्य जीवन में वापस लौट जाता है।

This blog has been converted from the Youtube video- हीमोथोरेक्स (छाती की गुहा में रक्त): दूरबीन सर्जरी (VATS) की भूमिका क्या है?

Dr. Arvind Kumar
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