हार्ट अटैक: जानिए तुरंत क्या करें, जान बचाएं!
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हार्ट अटैक क्या है?
हार्ट अटैक एक गंभीर स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति अचानक कम या अवरुद्ध हो जाती है। यह आमतौर पर हृदय की धमनियों, कोरोनरी धमनियाँ, में रुकावट के कारण होता है, जिससे उस क्षेत्र की मांसपेशियों को आवश्यक ऑक्सीजन पहुँचने में समस्या होती है। इसके परिणामस्वरूप, माँसपेशियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे हार्ट अटैक हो सकता है। समय पर पहचान और उपचार हृदय क्षति और मृत्यु को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हार्ट अटैक के लक्षण:
सीने में दर्द या दबाव: यह हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है। दर्द सीने में कहीं भी हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर बाएं तरफ महसूस होता है। दर्द तेज या धीमा हो सकता है, और यह हाथों, जबड़े, गर्दन या पीठ में फैल सकता है।
सांस लेने में तकलीफ: हार्ट अटैक के दौरान सांस लेने में तकलीफ होना आम बात है।
मतली और उल्टी: हार्ट अटैक के दौरान मतली और उल्टी भी हो सकती है।
चक्कर आना या हल्का महसूस करना: हृदय को पर्याप्त रक्त न मिलने पर चक्कर आना या हल्का महसूस होना आम बात है।
ठंडा पसीना आना: हार्ट अटैक के दौरान ठंडा पसीना भी आ सकता है।
अत्यधिक थकान: अचानक और अत्यधिक थकान महसूस करना भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।
इनमें से कोई भी लक्षण अनुभव करने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना महत्वपूर्ण है।
हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करें:
शांत रहें और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा हेल्पलाइन 108 या 1298 पर कॉल करें।
यदि आप अकेले हैं, तो तुरंत मदद के लिए किसी को बुलाएं।
यदि आपके पास एस्पिरिन (80mg) की गोली है, तो इसे चबाकर निगल लें।
यदि आपके पास नाइट्रोग्लिसरीन की दवा है और आपको सीने में दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर के निर्देशानुसार इसका इस्तेमाल करें।
यदि व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले रहा है, तो सीपीआर (CPR) शुरू करें।
सीपीआर (CPR) क्या है?
सीपीआर एक जीवन रक्षक तकनीक है जो हृदय गति रुकने पर हृदय और फेफड़ों को कार्य करने में मदद करती है। सीपीआर सीखने के लिए, आप किसी प्रमाणित प्रशिक्षक से प्रशिक्षण ले सकते हैं या ऑनलाइन वीडियो देख सकते हैं।
हार्ट अटैक का खतरा होने पर इन दवाओं को घर पर रखें:
एस्पिरिन: एस्पिरिन रक्त के थक्कों को बनने से रोकने में मदद करती है।
नाइट्रोग्लिसरीन: नाइट्रोग्लिसरीन रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके हृदय के रक्त प्रवाह में सुधार करती है।
क्लोट-बस्टिंग दवाएँ: क्लोट-बस्टिंग दवाएँ रक्त के थक्कों को तोड़ने में मदद करती हैं जो हृदय की धमनियों को अवरुद्ध कर सकती हैं।
हार्ट अटैक का खतरा कम करने के उपाय:
धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है।
स्वस्थ आहार खाएं: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले प्रोटीन से भरपूर आहार खाएं। तला-भुना और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों, चीनी और नमक का सेवन सीमित करें।
नियमित व्यायाम करें: व्यायाम हृदय को स्वस्थ रखने और रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता का व्यायाम या 75 मिनट तीव्र व्यायाम करने का लक्ष्य रखें।
अपने वजन को नियंत्रित रखें: अधिक वजन या मोटापा हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है।
तनाव प्रबंधन: तनाव हृदय स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। तनाव प्रबंधन तकनीक सीखें, जैसे कि योग, ध्यान या गहरी सांस लेने के व्यायाम।
नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच करवाएं: अपने डॉक्टर से नियमित रूप से आपके कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और रक्त शर्करा के स्तर की जांच करवाएं।
मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें: मधुमेह और उच्च रक्तचाप हृदय रोग के मुख्य जोखिम कारक हैं। अपने डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएँ लें और अपने रक्त शर्करा और रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
जल्दी पहचान और उपचार हार्ट अटैक से होने वाली क्षति को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए, हार्ट अटैक के लक्षणों से अवगत रहना और तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है। अपने परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों को भी हार्ट अटैक के लक्षणों और सीपीआर के बारे में जागरूक करें।
आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद मिलने से जान बच सकती है।
हृदय रोग के अन्य जोखिम कारक:
आनुवंशिकी: यदि आपके परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, तो आपका जोखिम अधिक हो सकता है।
उम्र: उम्र बढ़ने के साथ, हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
लिंग: पुरुषों में महिलाओं की तुलना में हृदय रोग का खतरा अधिक होता है, हालांकि रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में भी यह खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष
हृदय रोग दुनिया भर में मौत का एक प्रमुख कारण है। हार्ट अटैक हृदय रोग का एक गंभीर रूप है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और हृदय रोग के जोखिम कारकों को नियंत्रित करके हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है। हालाँकि, हार्ट अटैक कभी भी किसी को भी हो सकता है। इसलिए, हार्ट अटैक के लक्षणों से अवगत रहना और तुरंत कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।