फेफड़ों के कैंसर का डायग्नोसिस कैसे होता है?
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फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसका समय पर निदान होना बहुत महत्वपूर्ण है। मेदांता के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार ने फेफड़ों के कैंसर के निदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आइए जानते हैं कि फेफड़ों के कैंसर का डायग्नोसिस कैसे किया जाता है।
फेफड़ों के कैंसर के निदान के लिए आवश्यक परीक्षण
डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर का डायग्नोसिस करने के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति खांसी या खांसी में खून आने की शिकायत लेकर आता है, तो निदान प्रक्रिया शुरू होती है।
छाती का एक्स-रे: प्रारंभिक परीक्षण
सबसे पहला परीक्षण छाती का एक्स-रे होता है। इस परीक्षण से डॉक्टर को फेफड़ों की स्थिति का प्रारंभिक अनुमान लग जाता है। हालांकि, एक्स-रे से केवल प्रारंभिक जानकारी ही मिलती है और इससे निश्चित निदान नहीं हो पाता।
सीटी स्कैन: अधिक विस्तृत जांच
छाती के एक्स-रे के बाद अगला कदम सीटी स्कैन होता है। सीटी स्कैन से फेफड़ों की अधिक विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर मिलती है। डॉ. कुमार बताते हैं कि सीटी स्कैन से डॉक्टर यह जान पाते हैं कि क्या वास्तव में कोई समस्या है जो फेफड़ों के कैंसर की ओर इशारा कर रही है। साथ ही, यह भी पता चलता है कि छाती के अंदर बीमारी कितनी फैली हुई है।
फेफड़ों के कैंसर का निश्चित निदान: बायोप्सी
डॉ. अरविंद कुमार इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि फेफड़ों के कैंसर का अंतिम और निश्चित निदान केवल बायोप्सी से ही होता है। बायोप्सी में, संदिग्ध ऊतक (टिशु) का एक छोटा सा नमूना लेकर उसकी माइक्रोस्कोप द्वारा जांच की जाती है।
डॉ. कुमार स्पष्ट करते हैं:
“मैं इस बात को कई बार दोहराना चाहूंगा कि डायग्नोसिस छाती के एक्स-रे से नहीं होता, सीटी से नहीं होता, या ब्रांकोस्कॉपी वगैरह से नहीं होता। डायग्नोसिस बायोप्सी करके ऊतक लेकर उसकी माइक्रोस्कोपिक जांच करने से होता है।”
बायोप्सी के विभिन्न तरीके
बायोप्सी कई तरीकों से की जा सकती है:
सीटी गाइडेड बायोप्सी: इसमें सीटी स्कैन के माध्यम से बाहर से सुई डालकर ऊतक का नमूना लिया जाता है।
ब्रोंकोस्कोपी: इस प्रक्रिया में नाक के रास्ते से एक दूरबीन (ब्रोंकोस्कोप) डालकर फेफड़ों से ऊतक का नमूना लिया जाता है।
अन्य विधियां: डॉ. कुमार बताते हैं कि ऐसे कई अन्य तरीके भी हैं जिनके द्वारा शरीर के अंदर से किसी अंग से ऊतक का नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है।
बायोप्सी के बारे में आम भ्रांतियां
डॉ. अरविंद कुमार एक महत्वपूर्ण भ्रांति का भी खंडन करते हैं। कई लोगों का मानना है कि बायोप्सी करवाने से कैंसर फैल सकता है। इस बारे में डॉ. कुमार स्पष्ट करते हैं:
“बहुत लोगों में यह भ्रांति है कि अगर हम ऊतक लेने के लिए बायोप्सी करेंगे तो वह ट्यूमर फैल जाएगा। लोग बायोप्सी से डरते हैं। तो मैं यह बताना चाहूंगा कि बायोप्सी से ट्यूमर फैलने का कोई खतरा नहीं होता।”
निदान का महत्व
डॉ. कुमार यह भी बताते हैं कि बिना सही निदान के उपचार शुरू नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, बायोप्सी ही एकमात्र तरीका है जिससे लंग कैंसर का निदान पक्का और निश्चित होता है।
“बिना बायोप्सी के डायग्नोसिस हुए बिना उपचार नहीं दिया जा सकता। बायोप्सी ही एकमात्र तरीका है निदान को पक्का करने का।”
निष्कर्ष
फेफड़ों के कैंसर का सही और समय पर निदान होना बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, यद्यपि प्रारंभिक परीक्षण जैसे छाती का एक्स-रे और सीटी स्कैन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अंतिम और निश्चित निदान केवल बायोप्सी से ही होता है। बायोप्सी से ट्यूमर फैलने का कोई खतरा नहीं होता, और यह उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फेफड़ों के कैंसर के निदान के लिए कौन-कौन से परीक्षण किए जाते हैं?
फेफड़ों के कैंसर के निदान के लिए चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन और बायोप्सी जैसे परीक्षण किए जाते हैं।
क्या छाती के एक्स-रे से लंग कैंसर का निश्चित निदान हो सकता है?
नहीं, छाती के एक्स-रे से केवल प्रारंभिक जानकारी मिलती है। फेफड़ों के कैंसर का निश्चित निदान बायोप्सी से ही होता है।
बायोप्सी क्या है?
बायोप्सी एक प्रक्रिया है जिसमें संदिग्ध ऊतक (टिशु) का एक छोटा सा नमूना लेकर उसकी माइक्रोस्कोप के नीचे जांच की जाती है।
क्या बायोप्सी करवाने से कैंसर फैल सकता है?
नहीं, डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, बायोप्सी से ट्यूमर फैलने का कोई खतरा नहीं होता है।
बायोप्सी के कितने तरीके हैं?
बायोप्सी कई तरीकों से की जा सकती है, जैसे सीटी गाइडेड बायोप्सी, ब्रोंकोस्कोपी और अन्य विधियां जिनके द्वारा शरीर के अंदर से ऊतक का नमूना लिया जाता है।
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