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गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर: कारण, लक्षण, निदान और बचाव

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervical Cancer): कारण, लक्षण, निदान, इलाज और बचाव गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर, जिसे बच्चेदानी के मुँह का कैंसर या सर्वाइकल कैंसर भी कहा जाता है, महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। इस लेख में, हम डॉ. सभ्यता गुप्ता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करेंगे।

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर क्या है?

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर बच्चेदानी या गर्भाशय के मुंह में विकसित होता है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, यह कैंसर आमतौर पर एक वायरस के कारण होता है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर कैंसर का कारण बन सकता है। यह एक यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Disease) माना जाता है।

कारण और जोखिम कारक

  • वायरस संक्रमण: लंबे समय तक शरीर में रहने वाला एक विशेष वायरस (एचपीवी) इस कैंसर का प्रमुख कारण है।

  • यौन सक्रियता: यौन रूप से सक्रिय व्यक्तियों में यह रोग होने की संभावना अधिक होती है।

  • धूम्रपान: धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में इस कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है।

लक्षण

डॉ. गुप्ता बताती हैं कि शुरुआती अवस्था में कोई लक्षण न होना भी सामान्य है। हालांकि, निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • योनि से असामान्य स्राव

  • दो मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव

  • यौन संबंध के बाद रक्तस्राव

  • रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव या योनि से स्राव

निदान (Diagnosis)

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का निदान निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:

  • स्क्रीनिंग: नियमित स्क्रीनिंग से शुरुआती चरण में ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

  • कोल्पोस्कोपी: यह एक विशेष परीक्षण है जो गर्भाशय ग्रीवा की विस्तृत जांच करता है।

  • बायोप्सी: ऊतक का एक छोटा नमूना लेकर उसकी जाँच की जाती है।

  • डॉ. गुप्ता का मानना है कि गर्भाशय ग्रीवा के ऊतकों की बायोप्सी से निदान पुष्टि होती है।

इलाज

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का इलाज रोग की अवस्था पर निर्भर करता है:

  • प्रारंभिक चरण:

  • सर्जरी प्राथमिक उपचार विधि है।

  • युवा रोगियों के लिए प्रजनन क्षमता संरक्षण (fertility preservation) का विकल्प भी उपलब्ध है।

  • उन्नत चरण (Advanced Stage):

  • रेडिएशन थेरेपी

  • कीमोथेरेपी

डॉ. गुप्ता जोर देती हैं कि रोग का शीघ्र पता लगाना और उपचार शुरू करना महत्वपूर्ण है।

रोकथाम और बचाव

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को रोकने के लिए दो महत्वपूर्ण उपाय हैं:

  • नियमित स्क्रीनिंग: नियमित जांच से कैंसर का शीघ्र पता लगाया जा सकता है।

  • टीकाकरण:

  • 9 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों के लिए टीकाकरण सुरक्षित और प्रभावी है।

  • 26 वर्ष तक की महिलाओं के लिए टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • 45 वर्ष तक की महिलाएँ अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर टीकाकरण करवा सकती हैं।

निष्कर्ष

डॉ. सभ्यता गुप्ता का मानना है कि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर चर्चा जारी रहनी चाहिए। जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग से इस कैंसर को रोका जा सकता है। लक्ष्य है कि पूरा भारत और विश्व गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से मुक्त हो जाए।

याद रखें, बचाव बेहतर है। नियमित जांच और टीकाकरण के माध्यम से, हम गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा तैयार कर सकते हैं। अगर आपको कोई संदेह है या कोई लक्षण दिखाई देता है, तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण क्या है?

सर्वाइकल कैंसर आम तौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण की वजह से होता है, जो यौन संपर्क के दौरान फैलता है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं?

सर्वाइकल कैंसर के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • असामान्य रक्तस्राव – माहवारी के बीच, संभोग के बाद या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव होना

  • पेल्विक दर्द – लगातार या संभोग के दौरान दर्द महसूस होना

  • असामान्य योनि स्राव – दुर्गंधयुक्त, रक्त मिश्रित या अत्यधिक स्राव होना

  • मूत्र संबंधी समस्याएँ – पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब आना या कठिनाई होना 

मैं सर्वाइकल कैंसर को होने से कैसे रोक सकती हूँ? 

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए: 

  • एचपीवी वैक्सीन लगवाएं

  • नियमित पैप स्मीयर टेस्ट कराएं

  • सुरक्षित यौन संबंध बनाएं

  • धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें 

  • स्वस्थ आहार व जीवनशैली अपनाएं

This blog has been converted from the Youtube video- गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर: कारण, लक्षण, निदान, इलाज और बचाव | डॉ सभ्यता गुप्ता | गुरुग्राम

Dr. Sabhyata Gupta
Gynaecology and GynaeOncology
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